सुविचार 3440
हक ! तब ही, जब फर्ज अदा हो, _ नहीं तो बेईमानी है.
हक ! तब ही, जब फर्ज अदा हो, _ नहीं तो बेईमानी है.
ख़ुशी से बढकर पौष्टिक खुराक और दूसरी कोई नहीं है,
अतः खुद भी प्रसन्न रहिये और दुसरो को भी खुश रखिये !
लाभ हानि को पहचानने लग गये, “
_ उस समस्या को उसके विकराल अवस्था में आने से पहले ही उसे समाप्त कर दो..!!
_ समस्या तो जिंदगी का एक हिस्सा है, इससे भागना नहीं चाहिए..!
हमारे विचारों का स्तर ही हमारी निजी प्रसन्नता का स्तर निर्धारित करता है, हमारे व्यवहार का स्तर निर्धारित करता है, हमारा जीवन स्तर निर्धारित करता है !
इसलिए विचारों का स्तर उच्च बनाये रखिये बाकि सबका स्तर स्वयं ही ठीक हो जाएगा !!!