सुविचार 3381
आंखें सबकी एक सी, _ किंतु अलग है दृष्टि ।
एक स्वयं को देखती, _ एक देखती सृष्टि ।।
एक स्वयं को देखती, _ एक देखती सृष्टि ।।
_ वो “वक्त” नहीं देता !! _और जिसको “वक्त” दो वो “कदर” नहीं करता !!!
_ जिसके लिए आप हमेशा हाजिर रहते हैं.
तो आज बैठे- बैठे अपना समय व्यतीत मत करो.