सुविचार 3491

फिर से प्रयास करने से मत घबराना, _ क्योंकि इस बार शुरुआत शून्य से नहीं अनुभव से होगी.

शुरुआत अंत भी हो सकती है अगर इसका ध्यान न रखा जाए.

सुविचार 3490

स्वयं को बस इतना समर्थ बना लेना चाहिए कि अपने दुखों को किसी अन्य के साथ साझा ना करना पड़े…!!!

सुविचार 3488

” जीवन की सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि है, _ सच्चाई से स्वयं का विश्लेषण कर पाना “

सुविचार 3487

जैसे दौड़ कर पर्वत नहीं चढ़ा जा सकता, उसी तरह बहुत ज्यादा जल्दबाजी से

बड़ी सफलता नहीं पाई जा सकती..

सुविचार 3486

किसी को बद्दुआ देना अंततः आपको भी दुःख ही देता है और किसी के मंगल की कामना करना, _ आप के आंतरिक रूप को निखारता है ;

_ निखरा हुआ आंतरिक रूप आपके जीवन में भी मंगल ही लाता है.

व्यक्ति जितना भीतर से टूटता और बिखरता है,

_ उतना ही बाहर से सँवरता और निखरता है.

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