सुविचार 3615
हमारी सबसे बड़ी विडम्बना ही यही है कि _ हमे अपना ग़लत होना दिखाई नही देता _ परन्तु दूसरे ग़लत दिखाई पड़ते हैं.
जीवन में जीवन की खोज के सिवा सब कुछ खोज लिया जाता है.
_ इस विडम्बना भरे सत्य के साथ सब कुछ कितना निरर्थक है..!!
_ इस विडम्बना भरे सत्य के साथ सब कुछ कितना निरर्थक है..!!
_ वह अपने काम में ‘ एक्सपर्ट ‘ बनने की पूरी संभावना रखता है.
_ पर हर अंत में एक नई बेहतर शुरुआत की संभावना छुपी होती है.!!
ये तीन चीजें भेंट दी हों ” साथ “, ” समय “, और ” समर्पण ” !!
_ उसकी सोच ही उसे जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेणा देती है.
_ वे मनन के ज़रिए भावी संभावनाओं को पहले से ही जान लेते हैं.