सुविचार 3591
अंधेरा भी उजाले की सोहबत में उजाला हो जाता है.
अंधेरा भी उजाले की सोहबत में उजाला हो जाता है.
उजाला जिंदगी की गैरमौजूदगी में नहीं,
_ उसे फिर से जीने की हमारी जिद में पैदा होता है.!!
_ उसे फिर से जीने की हमारी जिद में पैदा होता है.!!





