सुविचार 3364

सहनशीलता अपनी जगह ठीक है, लेकिन इतनी भी नहीं कि अन्याय का विरोध ना कर सको !!

“अन्याय के समक्ष, छाती तान कर, खड़ा होना ही वीरता कहलाता है “

सुविचार 3363

मूर्खों से बहस करना गाल पर बैठे मच्छर को मारने जैसा है,

मच्छर मरे या न मरे, पर आपको स्वयं एक चांटा अवश्य लग जाएगा.

सुविचार 3362

अगर जीवन में व्यथा है तो व्यवस्था पर ध्यान दीजिये !

If there is suffering in life, then pay attention to the structure in your life !

सुविचार 3360

” निर्णय करने के लिए तीन तत्वों की आवश्यकता होती है,

अनुभव, ज्ञान, और व्यक्त करने की क्षमता,”

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