सुविचार 3347
“कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं हो सकता है, _ जीवन हर किसी के साथ अलग व्यवहार कर रहा है _
_ इसमें महारत हासिल करने की आपकी बारी है.
_ इसमें महारत हासिल करने की आपकी बारी है.
कोई “बांस” का “तीर” बनाकर किसी को “घायल” करता है..!
तो कोई “बांसुरी” बनाकर बांस में “सुर” को भरता है..!
_हमने अपने जीवन में कितनी अच्छाई का अनुभव किया है..
और जब कोई व्यक्ति सुधार कर सकता है, तो वह कभी शिकायत नहीं करता.
क्योंकि सुबह उनकी भी होती है, जिनके दिन खराब हों.
कर के दिखा दे कोई कमाल, तो तुझ पर सब अभिमान करेंगे…