सुविचार 3408
परेशानी से निपटने की परेशानी उतनी भी बड़ी नहीं होती, _
_ परन्तु हम उसे अत्यधिक सोच – सोच कर बड़ा बना देते हैं ..
_ परन्तु हम उसे अत्यधिक सोच – सोच कर बड़ा बना देते हैं ..
_ जो अपने आपसे उम्मीद रखते हैं किसी और से नहीं.
_ इसलिए जो भी है उसे स्वीकार कर के बेहतर बनाएँ..
हमें इन बातों को ऐसे सहन करना चाहिए जैसे किसी उल्टे घड़े पर पानी उँड़ेला जा रहा हो,
वह घड़ा अपने भीतर पानी को बिलकुल नहीं लेता.