सुविचार 3401

आप यह निश्चित रूप से जान लें कि आपकी अकेली ईमानदारी में बहुत बड़ा बल है,

हाँ वह ईमानदारी पत्थर की चट्टान की तरह दृढ और अभेद्य होनी चाहिए,

अकेले आपके ईमानदार होने से, घर पास- पड़ौस में, व्यवसाय में और सभी छेत्रों में जहाँ आप प्रवेश करते हैं,

वहीँ, कुछ न कुछ परिवर्तन अवश्य होता है.

सुविचार 3400

सफलता के लिए व्यक्ति प्रयास अकेला करता है, _

_ लेकिन उसके पीछे प्रेरणा और प्रोत्साहन बहुतों की होती है.

सुविचार 3398

“लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं.”

दूसरों को देखकर अपने को मत बदलो, सीखते चलो”

सुविचार 3397

गलत बात पर चुप रहने वाले भी उतने ही दोषी होते हैं _ जितना की गलत करने वाले

– ” गलत को गलत बोलना सीखो -“

error: Content is protected