सुविचार 3337
जरूरतें, जिम्मेदारियां और ख्वाहिशें, _ यूँ तीन हिस्सों में दिन गुज़र जाता है.
जरूरतें, जिम्मेदारियां और ख्वाहिशें, _ यूँ तीन हिस्सों में दिन गुज़र जाता है.
चुरा लेना खूबसूरत पल जिंदगी से वरना जिम्मेदारियां फुरसत नहीं देती.!!
क्यूँकि नदी को भी सागर से मिलने के लिए मौसम और बाढ़ आने का इंतजार करना पड़ता है.
कर्मों से भी लोगों के मुंह बंद किए जा सकते हैं.
You can use many words, but your actions and patterns will show me everything.