सुविचार 3395
मत कर मायूस खुद को बुलन्दी से गिरने के बाद, _
_ राहें नई भी खुलती हैँ तूफानों के गुजरने के बाद ..
_ राहें नई भी खुलती हैँ तूफानों के गुजरने के बाद ..
वक़्त कैसा भी हो, ज़माना जो भी कहे… ये सब बेवकूफ़ियाँ नहीं हैं…
… इनके लिए कभी शर्मिंदा मत होना….
_ जिससे उस बुरी खबर का सामने वाले पर असर कम पड़े.!!
…खुद को मजबूत बताने के लिए न जाने कितनी मेहनत एवमं त्याग की आवश्यकता होती है…ये हर किसी के वश की बात नहीं….!!!
_ तो वह पूर्ण सफलता प्राप्त करने में कभी विफल नहीं होगा.