सुविचार 3389
भीड़ से अलग निकलना ही है “ज़िंदगी”
भीड़ से अलग निकलना ही है “ज़िंदगी”
भीड़ में सब लोग अच्छे नहीं होते, और अच्छे लोगों की भीड़ नहीं होती..!!
“बस हक़ और सच बोलें” बेशुमार दुश्मन आपको अपने खानदान में ही मिल जायेंगे.
_ ज़िन्दगी की मुश्किलों का, सामना करने की ताकत मिले _ “जिंदगी न मिलेगी दुबारा”
जैसे सुधार के लिए आलोचना से ज्यादा ‘समालोचना’ की जरूरत होती है !