सुविचार 4896
ऊपर वाले के इस जगत में.. हम अनगिनत प्राणी _ यहाँ मेहमान से अधिक कुछ नहीं हैं..!!!
जगत इतनी रहस्यपूर्ण घटना है कि यहां हर कोई किसी को समझ नहीं सकता.!!
उसके लिए एक लक्ष्य, प्लान और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है…!!!
*तो “आत्मबल” का ऐसा उत्तम उपहार दे जाती है*
*जो उन “कष्टों” “दुःखों” की तुलना में “हजारों” गुना “मूल्यवान” होता है*