सुविचार 3105

चौराहे पर खड़ी जिंदगी, नजरें दौड़ाती है…

काश कोई बोर्ड दिख जाए, जिस पर लिखा हो…..” सुकून..0,कि. मी. “

सुविचार 3103

सही काम करने के लिए आपको समूह की ज़रूरत नहीं होती,

ज़मीर ज़िंदा हो तो आप अकेले भी पर्याप्त हैं.

सुविचार 3102

स्वीकार करने की हिम्मत और सुधार करने की नीयत हो तो

इंसान बहुत कुछ कर सकता है.

सुविचार 3101

” मूल्यहीन जीवन का कोई अर्थ नहीं है, जीवन के मूल्य स्वयं ही तय करने होते हैं,”

सुविचार 3100

हर रोज़ अपने अंदर जाएं और अपने आंतरिक बल को जानें

ताकि आपके जीवन में कभी भी कोई भी अंधकार न फैला सके.

error: Content is protected