सुविचार 3107
जो दुख में जीने को राजी है, उससे सुख कौन छिन सकता है.
जो दुख में जीने को राजी है, उससे सुख कौन छिन सकता है.
काश कोई बोर्ड दिख जाए, जिस पर लिखा हो…..” सुकून..0,कि. मी. “
बासी सोच से समय बासने लग जाता है,”
ज़मीर ज़िंदा हो तो आप अकेले भी पर्याप्त हैं.
इंसान बहुत कुछ कर सकता है.