सुविचार 3159

किसी भी इन्सान को उसके सोचने का नजरिया ही एक अच्छा इन्सान बनाता है.

सुविचार 3158

शक्तिशाली बनना चाहते हैं तो किसे बनाऐं मित्र ?

व्यक्ति स्वयं ही स्वयं का मित्र है, स्वयं का शत्रु है, अपने मन से निराशा का भाव हटाकर अपने मन को खुद उठाए, शक्तिशाली बनना चाहते हैं तो मन को मित्र बनाऐं.

सुविचार 3157

”जब ‘मैं, मुझे और मेरा’ को अहमियत दी जाती है, तब घनिष्टता कहीं खो जाती है

और संबंधों में दरार आने लगती है.

सुविचार 3156

मनुष्य को अपनी शक्ति के सहारे खड़ा होना चाहिए, दूसरे के आसरे नहीं.

सुविचार 3155

ईमानदारी की कमाई इंसान खाता है और बेईमानी की कमाई इंसान को खा जाती है.

सुविचार 3154

जब जीवन के कष्ट, दुख, हमें नचाते नाच ।

अपनो के अपनत्व का, तब दिखता है साँच ।।

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