सुविचार 2982
हमें गैर- जरुरी तर्क वितर्क और बेकार की आलोचना में नहीं पड़ना चाहिए.
हमें गैर- जरुरी तर्क वितर्क और बेकार की आलोचना में नहीं पड़ना चाहिए.
जिन बातों का कोई हमारे पास जवाब ना हो, वही हमें कुतर्क लगने लगता है..!!
और परिस्थितियाँ इंसान को जीने का ढंग सिखाती है.
पर दुख भी दूँगा नहीं, कभी किसी को व्यर्थ.
और अगर किसी के सुख की वजह हैं, तो ही हमारे जीवन का कुछ अर्थ है.
_किसी के बारे में बोलने के बजाय किसी के साथ बोलना शुरू कर दो.
कदर नहीं अफ़सोस कहलाता है…