सुविचार – साल 2020 गुजर गया – 2935

दर्द देखते देखते ये साल गुजर गया,

क्या तेरा, क्या मेरा, सबका एक जैसा हाल गुजरा..

कल, 365 पेज वाली किताब का पहला सादा पन्ना है, इसे अच्छे से लिखना.
उबलते हुए आंसुओं के प्याले लेकर लौटे हैं..

निवाले कमाने गये थे पर छाले लेकर लौटे हैं,

पूरी दुनिया का “सन्नाटा” बता रहा है,,,,

“बादशाहत” सिर्फ मेरे रब की है..!!!

सुविचार 2934

मुट्ठी भर लोग ही इस जगत में ज्ञान को उपलब्ध हुए हैं,,,

बाकी दुनिया को ज्ञान का केवल भ्र्म है,,,,

सुविचार 2933

ध्यान रहे, अगर दुनिया से अलग बनना है तो दुनिया से अलग करना भी होगा.

सुविचार 2932

ज़िन्दगी छोटी है नहीं, बल्कि लगती है,

क्योंकि यहां समय का सदुपयोग कम दुरूपयोग ज्यादा है.

सुविचार 2931

गर ज़िन्दगी एक किताब है, तो उसके हर पन्ने पर एक अलग कहानी लिखने की कोशिश कीजिए. वो तभी मजेदार होगी.

सुविचार 2930

जो किसी भी कीमत पर हारना न जानता हो, वो एक न एक दिन सफल होता ही है.

A person who does not accept defeat at any cost, will be successful one day.

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