सुविचार 2923
भीतर की स्थिति बदलनी चाहिए, वह अगर बदल जाए,
_तो बाहर भी अभिव्यक्ति अपने आप बदल जाएगी.
अभिव्यक्ति [Expression] को आप कुछ देर के लिए दबा भले देंगे,
_लेकिन उसका गला नहीं घोंट पाएंगे.
_तो बाहर भी अभिव्यक्ति अपने आप बदल जाएगी.
_लेकिन उसका गला नहीं घोंट पाएंगे.
क्योंकि शक़ सदा सोने की शुद्धता पर किया जाता है कोयले की कालिख पर नहीं.
वह द्वार है समस्याओं की समझ.
सृष्टि की सबसे लंबी दूरियाँ तय करता है..
लेकिन मात्र हमारे सही होने से सामने वाला ग़लत नहीं हो जाता… !!”
वह इंसान बहुत से लोगों को अप्रिय लगने लगता है.