सुविचार 2927
” व्यक्ति ” अपनी बेइज्जती माफ तो कर सकता है..
लेकिन बेइज्जती भूल जाना नामुमकिन है.
लेकिन बेइज्जती भूल जाना नामुमकिन है.
तब आपको कोई भी नहीं रुला सकता.
_ दुश्मनी की दीवार खड़ी कर लेते हैं.
_तो बाहर भी अभिव्यक्ति अपने आप बदल जाएगी.
_लेकिन उसका गला नहीं घोंट पाएंगे.
क्योंकि शक़ सदा सोने की शुद्धता पर किया जाता है कोयले की कालिख पर नहीं.