सुविचार 2755
इंसान कम के साथ कुंठित और ज्यादा के साथ दुःखी होता है…
इंसान कम के साथ कुंठित और ज्यादा के साथ दुःखी होता है…
जिन विचारों या बातों को हमारा दिमाग सही मानता है, और फिर भी हम उनको जीने का साहस नहीं कर पाते,
तो वही विचार हमको बीमार बनाते हैं, यही है ” डिप्रेशन “
फकत धागा भी ताबीज बन जाता है.
झांकना खुद की झोली में है कि कहीं कोई ‘सुराख’ तो नहीं*
सही हो तो गुमराह नहीं होने देते…!