सुविचार 2570
उम्र थका नहीं सकती ठोकरें गिरा नहीं सकती.
अगर जीतने की जिद हो तो परिस्थितियां भी हरा नहीं सकती.
अगर जीतने की जिद हो तो परिस्थितियां भी हरा नहीं सकती.
जिन्हें एक पन्ना भी नसीब नहीं होता
और पूरी हो जाती है.
मैं एक ऐसी ही किताब हूँ
जो बिना कुछ लिखे भी लिखी हुई है
पूरी तरह भरी हुई है
और इसका पूरापन यह है
कि यह पूरी तरह अधूरी है
– ‘सदैव ‘ –
इसलिए दूसरों से खुद की तुलना करना छोड़ कर अपनी ताकत पहचानें और उसे और मजबूत बनाएं.