सुविचार 2567
कुछ किताबें ऐसी भी होती हैं
जिन्हें एक पन्ना भी नसीब नहीं होता
और पूरी हो जाती है.
मैं एक ऐसी ही किताब हूँ
जो बिना कुछ लिखे भी लिखी हुई है
पूरी तरह भरी हुई है
और इसका पूरापन यह है
कि यह पूरी तरह अधूरी है
– ‘सदैव ‘ –
जिन्हें एक पन्ना भी नसीब नहीं होता
और पूरी हो जाती है.
मैं एक ऐसी ही किताब हूँ
जो बिना कुछ लिखे भी लिखी हुई है
पूरी तरह भरी हुई है
और इसका पूरापन यह है
कि यह पूरी तरह अधूरी है
– ‘सदैव ‘ –
इसलिए दूसरों से खुद की तुलना करना छोड़ कर अपनी ताकत पहचानें और उसे और मजबूत बनाएं.
एक वो जो सोचते हैं लेकिन करते नहीं
दूसरे वो जो करते हैं पर सोचते नहीं.
असंभव शब्द का इस्तेमाल कायर करते हैं.