सुविचार 2465
जब मनुष्य आवश्यकता से अधिक पा लेता है,
तब उसके चाल चलन और बात करने का तरीका बदल जाता है ..
तब उसके चाल चलन और बात करने का तरीका बदल जाता है ..
दिल में जगह बनाने में … ज़िन्दगी गुज़र जाया करती है..!!!
और नासमझ इंसान की जुबान…
जो लोग ईमानदारी से अपना जीवन जीते है वो खुद्दार ही होते है. लालच और स्वार्थ में आकर अपने आत्मसम्मान का सौदा नहीं करते है. _ परन्तु अब जमाना बदल रहा है लोग पैसे के लिए खुद्दारी और आत्मसम्मान को भी दांव पर लगाने में नहीं हिचकिचाते हैं.
और जिन पौधों की परवरिश धूप में होती है वो हर मौसम को झेल लेते हैं.