सुविचार 2292
जैसे पैदल चल पाने में असमर्थ लोग घोड़े की पीठ का सहारा लेते हैं,
उसी तरह किसी दुर्बल पछ का समर्थन करने वाले वक्ता बहुत आवेश व तेजी के साथ बोलने लग जाते हैं.
या अपने “गुरुर” से देख रहे हो !
नज़र रखो अपने ‘शब्द’ पर, क्योंकि वे ”कार्य” बनते हैँ.
नज़र रखो अपने ‘कार्य’ पर, क्योंकि वे ”स्वभाव” बनते हैँ.
नज़र रखो अपने ‘स्वभाव’ पर, क्योंकि वे ”आदत” बनते हैँ.
नज़र रखो अपने ‘आदत’ पर, क्योंकि वे ”चरित्र” बनते हैँ.
नज़र रखो अपने ‘चरित्र’ पर, क्योंकि उससे ”जीवन आदर्श” बनते हैँ.
आत्मविश्वास सब से बड़ा दोस्त है.
_ खुशियों व दुख को नहीं समझ सकते तो उन का प्यार खोखला है.
ऐसा करने पर सफलता सुनिश्चित है.