सुविचार 2292

जैसे पैदल चल पाने में असमर्थ लोग घोड़े की पीठ का सहारा लेते हैं, उसी तरह किसी दुर्बल पछ का समर्थन करने वाले वक्ता बहुत आवेश व तेजी के साथ बोलने लग जाते हैं.

सुविचार 2291

अगर आप किसी को छोटा देख रहे हो, तो आप उसे या तो “दूर” से देख रहे हो

या अपने “गुरुर” से देख रहे हो !

सुविचार 2290

” नज़र रखो अपने ‘विचार’ पर, क्योंकि वे ”शब्द” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘शब्द’ पर, क्योंकि वे ”कार्य” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘कार्य’ पर, क्योंकि वे ”स्वभाव” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘स्वभाव’ पर, क्योंकि वे ”आदत” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘आदत’ पर, क्योंकि वे ”चरित्र” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘चरित्र’ पर, क्योंकि उससे ”जीवन आदर्श” बनते हैँ.

सुविचार 2289

स्वास्थ्य सब से बड़ी संपत्ति है. संतोष सब से बड़ा खजाना है.

आत्मविश्वास सब से बड़ा दोस्त है.

सुविचार 2288

अगर दो लोग खुद को प्रेमी बतलाते हैं और एकदूसरे की

_ खुशियों व दुख को नहीं समझ सकते तो उन का प्यार खोखला है.

सुविचार 2287

काम वही करना चाहिए जिसे अच्छी तरह करने का मन में विश्वास हो,

ऐसा करने पर सफलता सुनिश्चित है.

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