सुविचार 2441
कोई ” जन्नत ” का तालिब है, तो कोई अपने ” गम ” से परेशान ;
_ ” जरूरतें ” सजदा करवाती हैं, आजकल ” इबादत “कौन करता है..
हम हैं काबा हम हैं बुतख़ाना हमीं हैं कायनात,
_ हो सके तो खुद को भी इक बार सजदा कीजिए.
_ ” जरूरतें ” सजदा करवाती हैं, आजकल ” इबादत “कौन करता है..
_ हो सके तो खुद को भी इक बार सजदा कीजिए.
लेकिन बैठिए वहीं जहां अपनेपन का अहसास हो.
समय खुद ही आपकी पहचान दूसरों से करवायेगा.
सब
😎 किरदार किताबों
📖 में नहीं होते !
लेकिन जिसे लग जाती है, उसका जीवन बदल देती है.
मगर जिनकी नियत ख़राब हो उनसे दूर रहना ही बेहतर होता है.