सुविचार 2285
स्वयं को जानने के दो ही मार्ग
या तो किसी जाग्रत की …. संगत ….पाकर जीना
या फिर इस जगत में … असंगत …. होकर जीना.
या तो किसी जाग्रत की …. संगत ….पाकर जीना
या फिर इस जगत में … असंगत …. होकर जीना.
इनको दूर से निहारो तो आनंद देते हैं,
अगर पकड़ने की कोशिश की तो मर जाते हैं.
कोई तन का, कोई मन का, कोई धन का.
यदि उन्हें बहुत बड़ी महत्त्वाकांछाएं परेशान न किए हों.