सुविचार 2197

नाराज न होना कभी,__यह सोचकर कि काम मेरा_

_और नाम किसी का हो रहा है.._?

_*घी और रुई सदियों से, जलते चले आ रहे हैं…,*_

_*और* लोग कहते हैं, दिया जल रहा है।*

सुविचार 2195

“जीवन का सत्य”

‘लोहा’ नरम होकर…’औजार’ बन जाता है,

‘सोना’ नरम होकर…’जेवर’* बन जाता है,

‘मिट्टी’ नरम होकर…’खेत’* बन जाती है,

‘आटा’ नरम होता है तो ‘रोटी’ बन जाती है,

ठीक इसी तरह अगर “इंसान” भी नरम हो जाये तो लोगो के “दिलों” मे अपनी जगह बना लेता है.

_सदैव बेहतर की उम्मीद करे !_”खुश रहिये मुस्कुराते रहिये”

सुविचार 2194

रूठने का हक़ तो अपने ही देते हैं, परायों के सामने तो मुस्कुराना ही पड़ता है.

सुविचार 2193

चाहे आप अपनी जिंदगी में कितने भी ऊपर उठ जाओ,

लेकिन कभी अपनी गरीबी और कठिनाई के दिन न भूलना.

सुविचार 2192

जो गुजर चुका है उसे पीछे मुड़ कर मत देखो,

वर्ना जो आगे मिलने वाला है उसे भी खो दोगे.

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