सुविचार 2197
नाराज न होना कभी,__यह सोचकर कि काम मेरा_
_और नाम किसी का हो रहा है.._?
_*घी और रुई सदियों से, जलते चले आ रहे हैं…,*_
_*और* लोग कहते हैं, दिया जल रहा है।*
_और नाम किसी का हो रहा है.._?
_*घी और रुई सदियों से, जलते चले आ रहे हैं…,*_
_*और* लोग कहते हैं, दिया जल रहा है।*
अज्ञान रुलाता है, ज्ञान आ जाए तो व्यक्ति को आनन्दित करता है.
‘लोहा’ नरम होकर…’औजार’ बन जाता है,
‘सोना’ नरम होकर…’जेवर’* बन जाता है,
‘मिट्टी’ नरम होकर…’खेत’* बन जाती है,
‘आटा’ नरम होता है तो ‘रोटी’ बन जाती है,
ठीक इसी तरह अगर “इंसान” भी नरम हो जाये तो लोगो के “दिलों” मे अपनी जगह बना लेता है.
_सदैव बेहतर की उम्मीद करे !_”खुश रहिये मुस्कुराते रहिये”
लेकिन कभी अपनी गरीबी और कठिनाई के दिन न भूलना.
वर्ना जो आगे मिलने वाला है उसे भी खो दोगे.