सुविचार 2025
हम क्यों किसी के बारे में बुरा सोच कर अपना “वक्त” और “कर्म” खराब करें..
हम क्यों किसी के बारे में बुरा सोच कर अपना “वक्त” और “कर्म” खराब करें..
मैं उनके कारण क्रोधित हूं…मैं उनके कारण खुश हूं…
हम अपने जीवन को, अपने आप की भावनाओं को,
दूसरों के द्वारा संचालित होने पर निर्भर कर देते हैं,
आप स्वयं अपनी भावनाओं के निर्माता हैं,
इसलिए दूसरों पर निर्भर न रहें..
जीवन में जब भी स्थितिया बिगड़ जाए, मनमाफिक न हो, कई कोशिशो के बावजूद काम नहीं बन रहा हो तो शान्ति और धैर्य धारण करिए, ऐसे समय को अपनी सहन शक्ति, एकाग्रता और ज्ञान बढाने में लगाइए ! अच्छी पुस्तको को पढ़िये, ध्यान करिए और कुछ नहीं तो बिलकुल शांत, मौन और सहज रहकर अपने कार्य करते रहिये, आपको आश्चर्य होगा किन्तु कुछ समय व्यतीत होने के बाद आपको लगेगा की अच्छा हुआ जो शांत रहे, व्यर्थ क्रोध नहीं किया, क्यूंकि अक्सर इंसान इनसे उभर जाता है किन्तु इस दौरान उसके द्वारा कही गई गलत बातें और गलत कार्य उसे और दुसरो को याद रहते हैं ! जिनका स्मरण अक्सर दुखदायी होता है !!!
किसी के मन को खुश न कर सके, तो सब व्यर्थ है.
कभी हारना तो कभी झुकना तो, कभी सहना, और कभी कभी खुद को हराना भी पड़ता है.
आम पककर स्वयं गिर जाते है…
इसी तरह जब हमारी सत्य की समझ बढ़ जाती है…
तो स्वयं ही हमारा भटकना बंद हो जाता है…