सुविचार 2199
जहाँ “प्रयत्नों” की ऊंचाई अधिक होती है,
वहां “किस्मत” को भी झुकना पड़ता है.
वहां “किस्मत” को भी झुकना पड़ता है.
_और नाम किसी का हो रहा है.._?
_*घी और रुई सदियों से, जलते चले आ रहे हैं…,*_
_*और* लोग कहते हैं, दिया जल रहा है।*
अज्ञान रुलाता है, ज्ञान आ जाए तो व्यक्ति को आनन्दित करता है.
‘लोहा’ नरम होकर…’औजार’ बन जाता है,
‘सोना’ नरम होकर…’जेवर’* बन जाता है,
‘मिट्टी’ नरम होकर…’खेत’* बन जाती है,
‘आटा’ नरम होता है तो ‘रोटी’ बन जाती है,
ठीक इसी तरह अगर “इंसान” भी नरम हो जाये तो लोगो के “दिलों” मे अपनी जगह बना लेता है.
_सदैव बेहतर की उम्मीद करे !_”खुश रहिये मुस्कुराते रहिये”