सुविचार 1915

स्वतंत्र मन……

जिम्मेदारियां निभाते हुए, जवाबदारियाँ संभालते हुए, मन को सदा स्वतंत्र और अप्रभावित रखना – यह भी एक कला है, साधना है !!!

सुविचार 1914

जब आप किसी शख्श को उसकी दौलत की वजह से इज्जत देने लगो, तो समझ लेना की आपने अपना ईमान गंवा दिया है.

सुविचार 1913

दवा जेब में रखने से नहीं शरीर में जाने से काम करता है, उसी तरह अच्छे विचार सुनने या पढ़ने से नहीं, बल्कि हृदय में उतारने से असर करता है.

सुविचार 1912

“दर्पण” जब चेहरे का दाग दिखाता है, तब हम “दर्पण” नहीं तोडते, बल्की “दाग” साफ करते हैं, उसी प्रकार, हमारी “कमी” बताने वाले पर “क्रोध” करने के बजाय अपनी “कमी” को दूर करना चाहिए न की कमी बताने वाले से रिश्ता तोडना चाहिए.

सुविचार 1911

दूसरों को स्वयं से नाजायज फायदा उठाने देना, परोपकार नहीं बल्कि मूर्खता है.

सुविचार 1910

क्रोध मनुष्य को अधिकतर तब आता है, जब वह अपने आप को कमजोर या हारा हुआ पाता है.
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