स्वीकार करने की हिम्मत और सुधार करने की नीयत मन में हो तो अपनी भूल से भी इन्सान बहुत कुछ सीख कर आगे बढ़ सकता है.
सुविचार 2029
जीवन का ‘आरंभ’ अपने रोने से होता है और जीवन का ‘अंत’ दूसरों के रोने से,
इस “आरंभ और अंत” के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है.
सुविचार 2028
जैसी संगत वैसी रंगत
मनुष्य जैसी संगति करता है, जैसे वातावरण और माहौल में रहता है, जैसे विचार करता है, जैसा जैसे विचार सुनता है वैसे ही संकल्प करने लगता है, वैसा ही आचरण करने लगता है और जैसा आचरण करता है, फिर वैसा ही उसका रूप और स्वभाव बन जाता है. जिन बातों का बार-बार विचार करता है, धीरे-धीरे वैसी ही इच्छा हो जाती है, फिर उसी के अनुसार वार्ता, आचरण, कर्म और गति होती है.
सुविचार 2027
जो लोग भरी थाली में लात मारते हैं,
उनको जीवन भर दूसरों की थाली की केवल झूठन ही मिलती है..
सुविचार 2026
अगर किसी के व्यवहार से सुख की अनुभूति नही होती,
तो वो नफरत का नही दया का पात्र होता है,
क्योंकि कोई भी समझदार इंसान कभी किसी को दुख नही दे सकता.
सुविचार 2025
कोई हमारा बुरा करना चाहता है तो यह उसके “कर्मों” में लिखा जाएगा,
हम क्यों किसी के बारे में बुरा सोच कर अपना “वक्त” और “कर्म” खराब करें..







