सुविचार 1837
यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लें,
कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह भी “अन्न दान” है.
कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह भी “अन्न दान” है.
अपनों की आँखों से छलकते आँसू नहीं पढ़ पाये तो “अनपढ़” हैं हम.
दुनिया आपके उदाहरण से बदलेगी आपकी राय से नहीं…