सुविचार 1725
कोई हमारे कर्मों के फल में भागीदार नहीं बन सकता,
अतः आप किसी को देख कर यदि अच्छा कार्य नहीं कर सकते तो बुरा भी न करें.
बस सदा प्रश्न यही रहता है, कि हम चाहते क्या हैं?
ज्ञान सबसे बड़ा धन है ! स्वयं से पूछिए की आप कितने धनवान है ? इमानदारी से इसका आकलन करके इसे निरंतर बढाने के लिए प्रयत्नशील रहिये !!!
सफलता बहुत संघर्ष व बलिदान मांगती है. निश्चय सुदृढ़ हो तथा अपने लछ्य तक पहुंचने के लिए यदि कोई शख्स आने वाली हर मुसीबत का सामना करने के लिए तैयार हो तो फिर कामयाबी पाने में कोई संदेह शेष नहीं रह जाता है.