सुविचार 1764
दुखों की प्राप्ति होने पर जिसका मन विचलित नहीं होता, सुखों की प्राप्ति से भी जो प्रसन्न नहीं होता, तथा जो राग, भय और क्रोध से मुक्त हो गया है, उसे स्थिरबुद्धि कहा जाता है.
मनुष्य का बड़ा होना अच्छी बात है, लेकिन उसके व्यक्तित्व में गहराई और विचारों में शुद्धता भी होनी चाहिए, तभी वह महान बनता है.