सुविचार 1638

प्रेरणा….

प्रेरणा अंतर्मन से निकली हुए अग्नि होती है, कभी कभी ये दुसरे के प्रभाव से भी उत्पन्न होती है किन्तु वो ज्यादा देर तक टिक नहीं पाती ! अतः सदेव अंतर्मन से प्रेरणा लें, यदि किसी अन्य स्त्रोत से मिल भी जाए तो यथा संभव उसे अपने अंतर्मन से एकाकार कर लेवे ताकि वो स्थाई हो सके !!!

सुविचार 1637

हर सुबह दर्पण में देखकर अपने आप से पूछो की ज़िंदगी को कहाँ देखना चाहते हो,

कौन सी मंजिल पाना चाहते हो, फिर उसे पूरा होने के लिए रब से प्रार्थना करो.

 

सुविचार 1636

दूसरों से सम्मान पाने से पहले खुद का सम्मान करें अर्थात अपने बारे में सकारात्मक सोचें नकारात्मक नही.

सुविचार 1635

जीवन कठिन तब लगता है जब हम स्वयं को बदलने के बजाए परिस्थितियों को बदलने का प्रयास करते हैं.

सुविचार 1634

दुनिया की सबसे अच्छी किताब हम स्वयं हैं, खुद को समझ लीजिए, सब समस्याओं का समाधान हो जाएगा.

सुविचार 1633

जो हमारे पास नहीं है उसे पाने की जब हम अभिलाषा रखने लगते हैं, तो जो कुछ हमारे पास होता है उस से ख़ुशी मिलनी बंद हो जाती है
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