सुविचार 1644
स्वयं की जिम्मेवारी स्वयं लेना ही सदा के लिए
दूसरों के बंधन से मुक्त होना है.
यार तुमको कभी चिंतित नहीं देखा, और हमको चिंताएं आज भी है,
मैंने कहा तुम पैसा कमाते रहे, और मैं संतोष,
मैंने वहीं किया जो मुझे संतोष देता रहा,
बस इतनी सी बात है.
कभी किसी का अपमान मत करो व कभी किसी को कम मत समझो.
आप शक्तिशाली हो पर समय आपसे भी अधिक शक्तिशाली है.