सुविचार 1456
प्रसन्न व्यक्ति वह है जो निरंतर स्वयं का मूल्यांकन एवं सुधार करता है
जबकि दुखी व्यक्ति वह है जो दूसरों का मूल्यांकन करता है.
क्योंकि जो आज है वो ही सबसे बड़ा मौका है..
हम दूसरों से उम्मीदे रख कर स्वयं से बहुत दूर चले जाते हैं, औऱ जीवन हमारा खुद का न रह कर कुछ और ही चीज बन जाता है.
फिर हमारा सिस्टम हमारे खिलाफ काम करने लगता है, क्योंकि हमने अपने भीतर के सिस्टम के लिये वो नही किया जो उसके लिए जरुरी था.
जकड़नें हम खुद पैदा करते हैं अपने लिये, “दूसरे” जीवन वैसा ही जीते हैं, जैसे वह हैं, उसमें उनकी कोई गलती नही है, लेकिन हमें जीवन वैसे ही जीना चाहिए जो सही है.