सुविचार 1643
आज़ ही एक मित्र ने कहा,
यार तुमको कभी चिंतित नहीं देखा, और हमको चिंताएं आज भी है,
मैंने कहा तुम पैसा कमाते रहे, और मैं संतोष,
मैंने वहीं किया जो मुझे संतोष देता रहा,
बस इतनी सी बात है.
यार तुमको कभी चिंतित नहीं देखा, और हमको चिंताएं आज भी है,
मैंने कहा तुम पैसा कमाते रहे, और मैं संतोष,
मैंने वहीं किया जो मुझे संतोष देता रहा,
बस इतनी सी बात है.
कभी किसी का अपमान मत करो व कभी किसी को कम मत समझो.
आप शक्तिशाली हो पर समय आपसे भी अधिक शक्तिशाली है.
प्रेरणा अंतर्मन से निकली हुए अग्नि होती है, कभी कभी ये दुसरे के प्रभाव से भी उत्पन्न होती है किन्तु वो ज्यादा देर तक टिक नहीं पाती ! अतः सदेव अंतर्मन से प्रेरणा लें, यदि किसी अन्य स्त्रोत से मिल भी जाए तो यथा संभव उसे अपने अंतर्मन से एकाकार कर लेवे ताकि वो स्थाई हो सके !!!