जिस प्रकार एक शराबी केवल तात्कालिक आनंद को ही देखता है, उस के अंतिम पतनशील परिणाम को नहीं देखता, उसी प्रकार एक बेईमान आदमी उस के तात्कालिक लाभ को ही देखता है, उस के अंतिम परिणाम को नहीं देखता.
सफलता की पहली शर्त है, अपने काम को कभी बोझ नहीं समझना. जिस तरह काम से लगाव सफलता की पहली सीढ़ी है, ठीक उसी तरह बोझ समझ कर किसी भी काम को करना असफलता की पहली सीढ़ी है.