सुविचार 1519
नजर और नसीब का कुछ ऐसा इत्तेफाक है कि नज़र को अक्सर वही चीज पसंद आती है जो नसीब में नहीं होती और नसीब में लिखी चीज अक्सर नजर नहीं आती है.
उसे जो ठीक लगा, उसने किया.
जिसने तुम्हारा सम्मान किया है, उसकी मौज.
उसे जो ठीक लगा उसने किया.
जो उसके पास था, उसने दिया.
तुम अपमान और सम्मान दोनों को एक ही
धन्यवाद के भाव से स्वीकार कर लेना,
दोनों का आभार प्रगट कर देना.