सुविचार 1507

शब्दों की ताकत असीम होती है, इसलिए इन्हें बहुत सोच समझ कर व्यवहार में लाना चाहिए. शब्द लगाव करते हैं तो घाव भी देते हैं, और एक बार यदि हमारे मुँह से निकल गए तो वापस कदापि नहीं लिए जा सकते हैं.

सुविचार 1506

हम खुशी को पाने की सौ कोशिश करते हैं, पर वह खुशी कुछ पलों में जाती रहती है. ऐसी कौन सी खुशी है जो हमारे साथ हमेशा रह सकती है ? यह है अंदरूनी खुशी यदि हम अंदर से खुश रहते हैं, तो बाहर उसका प्रभाव भी सुखद होता है.

सुविचार 1505

लोग कहां कदर करते हैं जज्बातों की _ इसलिए किसी के भी आगे दिल खोलना छोड़ दिया, _

_ और सफाई देना तो दूर की बात है _ हमने तो अपने हक में भी बोलना छोड़ दिया.

सुविचार 1503

हमें अपने स्त्रोत को बाहर की ओर बहने देना चाहिए. इसका परिणाम यह होता है कि हम जो कुछ भी करते है, उसमे दिव्यता आ जाती है. जब हम बोलते हैं, कुछ कहते हैं, बात करते हैं, चलते हैं तो उसमे दिव्यता होती है. क्योंकि इसे हम नहीं कर रहे हैं, यह तो हमारा आंतरिक स्त्रोत हमारे माध्यम से कर रहा है.
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