सुविचार 1331

अपने भीतर दुःख को भी बढ़ाया जा सकता है और सुख को भी. फर्क सिर्फ इतना है कि सुख तरंगायित करता हुआ बढ़ता है और दुःख मन को कचोटता हुआ.

सुविचार 1329

मनुष्य की विवेकशक्ति जितनी परिष्कृत व उच्च होगी,

_ उतना ही उसका नैतिक स्तर ऊँचा और प्रभावशाली होगा.

उच्च मन के लिए उच्च सोच जरूरी है, हमें निम्न विचारों से परेशान नहीं होना चाहिए,

_ बल्कि हमेशा उससे आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए..!!

सुविचार 1328

जीवन में वही इंसान सफल होता है जो शिष्ट होता है वरना योग्यता होने के बावजूद अपनी अशिष्टता के कारण हम असफल हो जाते हैं, इसलिए शिष्ट रहें.

सुविचार 1326

जिंदगी में कभी नकारात्मक न सोचें, क्योंकि आप जो सोचते हैं, वही बन जाते हैं.

इसलिए जो अच्छा चाहते हैं, उसके बारे में सोचें.

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