सुविचार 1433

जीवन_ शून्य से शिखर तक दुःख ..वेदना ….सघर्ष और लोगों के द्वारा आलोचना से भरा है ..

..जीना वो ही सीखता है जो पग पग संभल कर चलता है.

सुविचार 1432

हम हर दिन ज्ञान और सद्भाव की बड़ी- बड़ी बातें सीखते हैं और रोजाना वे बातें हमारे सामने से कई बार गुजरती हैं. हम सब पिंजरे के तोते की तरह बोलते और सुनते रहते हैं, लेकिन उसका कोई असर हमारे वास्तविक जीवन और कार्य पर होता नहीं दिखाई देता, जिस कारण हम हमेशा दुख, अवसाद और क्रोध के पिंजरे में कैद पड़े रहते हैं. अभी भी समय है. यदि हम उमंग और उल्लास से विशाल वातावरण में उड़ना चाहते हैं तो हमें अपने जीवन के शब्दों के अर्थ को मन से समझना होगा. यदि हम सचमुच ऐसा कर सके, तो हमारा जीवन निश्चित रूप से दूसरों के लिए एक प्रेरणा बनेगा, इसमें कोई संदेह नहीं.

सुविचार 1430

आपका ये जीवन आप ही की सोच का नतीजा है, _

अगर आप जीवन में दुख पा रहे हैं, _ तो याद रखें की ये पूरा जीवन आप ही की सोच का नतीजा है ;

_ अगर ये आपको नहीं पसंद, तो आपको आपकी सोच बदलनी पड़ेगी ;

_ जैसे ही आप अपनी सोच को देख कर बदलोगे, धीरे धीरे जीवन भी बदलना शुरू हो जाएगा ;

अच्छे और बुरे दोनो अनुभवों को एक साथ जोड़ने पर ही जीवन बनता है ; _जीवन सुख दुख के टुकड़ों में नही बंटता _बल्कि सुख दुख को जोड़ कर ही जीवन पूरा हो पाता है.!!

सुविचार – 1428

जीवन में भले ही विश्राम न हो, किन्तु आनन्द अवश्य होना चाहिए.
आने वाले कल के लिए हमें अपना आज का आनन्द नहीं खोना चाहिए,
_क्या पता कल आए या न आए और आए भी तो उसी रूप में न आए, जिस रूप में हम सोच बैठे हैं.
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