सुविचार 1153

जीवन में धूपछांव की तरह खुशी और गम साथसाथ चलते हैं. कहीं खुशी है तो कहीं गम. लेकिन व्यवहार का शिष्टाचार कहता है कि अपनी खुशियों को दूसरों के दुख से कम न समझें और उन के दुख में हिस्सेदार बनें.

सुविचार 1151

हम सभी के आस पास अच्छी बुरी बातों का पिटारा होता है. यह हम पर निर्भर करता है कि हम सही का चुनाव करते हैं या ग़लत का – किसी भी बात का अनुकरण करने के लिए विवेक की जरुरत होती है.

सुविचार 1150

जीवन के लिए संतुलन आवश्यक है. जब संतुलन होता है तो विकास होता है. आप जिंदगी बिताने नहीं आए, जीवन जीने के लिए आए हैं.

सुविचार 1149

अनेक काम धैर्य से संपन्न होते हैं और जल्दबाज मनुष्य सिर के बल गिरता हैं.

सुविचार 1148

अपने विषय मे कुछ कहना प्रायः बड़ा कठिन होता है, क्योंकि अपने दोष देखना आप को अप्रिय लगता है और उनको अनदेखा करना औरों को.
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