जीवन में धूपछांव की तरह खुशी और गम साथसाथ चलते हैं. कहीं खुशी है तो कहीं गम. लेकिन व्यवहार का शिष्टाचार कहता है कि अपनी खुशियों को दूसरों के दुख से कम न समझें और उन के दुख में हिस्सेदार बनें.
हम सभी के आस पास अच्छी बुरी बातों का पिटारा होता है. यह हम पर निर्भर करता है कि हम सही का चुनाव करते हैं या ग़लत का – किसी भी बात का अनुकरण करने के लिए विवेक की जरुरत होती है.