सुविचार 1062

गुण से भरी हुई बातें अपना लेनी ही चाहिए, उनका कहने वाला कोई भी क्यों न हो.

सुविचार 1061

किसी भी व्यक्ति से अत्यधिक लगाव हानिकारक है, क्योंकि लगाव उम्मीद की ओर ले जाता है और उम्मीद दुख का कारण बनती है.

सुविचार – छोड़ दीजिए – 1060

 

*छोड़ दीजिए*

एक दो बार समझाने से यदि कोई नही समझ रहा है तो सामने वाले को समझाना, _*छोड़ दीजिए*

बच्चे बड़े होने पर वो ख़ुद के निर्णय लेने लगे तो उनके पीछे लगना, _ *छोड़ दीजिए।*

गिने चुने लोगों से अपने विचार मिलते हैं, यदि एक दो से नहीं जुड़ते तो उन्हें, _*छोड़ दीजिए।*

एक उम्र के बाद कोई आपको न पूछे या कोई पीठ पीछे आपके बारे में गलत कह रहा है तो दिल पर लेना, _  *छोड़ दीजिए।*

अपने हाथ कुछ नहीं, ये अनुभव आने पर भविष्य की चिंता करना, _ *छोड़ दीजिए।*

यदि इच्छा और क्षमता में बहुत फर्क पड़ रहा है तो खुद से अपेक्षा करना, _ *छोड़ दीजिए।*

हर किसी का पद, कद, मद, सब अलग है इसलिए तुलना करना, _ *छोड़ दीजिए।*

बढ़ती उम्र में जीवन का आनंद लीजिए, रोज जमा खर्च की चिंता करना, _ *छोड़ दीजिए।*

उम्मीदें होंगी तो सदमे भी बहुत होंगे, यदि सुकून से रहना है तो उम्मीदें करना, _ *छोड़ दीजिए।* 

 

 

 

 

 

सुविचार 1059

अगर आप अपनी जिम्मेदारी खुद ले लेते हैं तो आप में अपने सपने सच करने की चाहत अपने आप विकसित हो जाएगी.

सुविचार – 1058

रोज सोचता हूं हैरान होना छोड़ दूंगा _ पर लोग हैं कि..

_ असली चेहरा दिखाकर हैरान कर ही जाते हैं..!!

अब मेल मिलाप नहीं, शिकवे शिकायतों का दौर है.

_ पहले होती थी मन की बातें, आज दिमागी दौड़ है!!

सुविचार 1057

अपनी वाणी की प्रभाव छमता बनाए रखने के लिए हमेशा अर्थपूर्ण शब्दों का ही प्रयोग करें.
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