सुविचार – जिन्दगी का सफ़र, हैं ये कैसा सफ़र – 1024
_ हम बीतते जाते हैं.. और एक दिन सब यहीं रह जाता है.!!
सुविचार – ज़िंदगी के दस सूत्र ” – 1023
इन दसों सूत्रों को पढ़ने के बाद पता चला कि सचमुच खुशहाल ज़िंदगी और शानदार मौत के लिए ये सूत्र बहुत ज़रूरी हैं।
1. *अच्छा स्वास्थ्य* – अगर आप पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं, तो आप कभी खुश नहीं रह सकते। बीमारी छोटी हो या बड़ी, ये आपकी खुशियां छीन लेती हैं।
2. *ठीक ठाक बैंक बैलेंस* – अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत अमीर होना ज़रूरी नहीं। पर इतना पैसा बैंक में हो कि आप आप जब चाहे बाहर खाना खा पाएं, सिनेमा देख पाएं, समंदर और पहाड़ घूमने जा पाएं, तो आप खुश रह सकते हैं। उधारी में जीना आदमी को खुद की निगाहों में गिरा देता है।
3. *अपना मकान* – मकान चाहे छोटा हो या बड़ा, वो आपका अपना होना चाहिए। अगर उसमें छोटा सा बगीचा हो तो आपकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल हो सकती है।
4. *समझदार जीवन साथी* – जिनकी ज़िंदगी में समझदार जीवन साथी होते हैं, जो एक-दूसरे को ठीक से समझते हैं, उनकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल होती है, वर्ना ज़िंदगी में सबकुछ धरा का धरा रह जाता है, सारी खुशियां काफूर हो जाती हैं। हर वक्त कुढ़ते रहने से बेहतर है अपना अलग रास्ता चुन लेना।
5. *दूसरों की उपलब्धियों से न जलना* – कोई आपसे आगे निकल जाए, किसी के पास आपसे ज़्यादा पैसा हो जाए, तो उससे जले नहीं। दूसरों से खुद की तुलना करने से आपकी खुशियां खत्म होने लगती हैं।
6. *गप से बचना* – लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए। जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे और दूसरों की चुगली-निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा।
7. *अच्छी आदत* – कोई न कोई ऐसी हॉबी विकसित करें, जिसे करने में आपको मज़ा आता हो, मसलन गार्डेनिंग, पढ़ना, लिखना। फालतू बातों में समय बर्बाद करना ज़िंदगी के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अपराध है। कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे आपको खुशी मिले और उसे आप अपनी आदत में शुमार करके नियमित रूप से करें।
8. *ध्यान* – रोज सुबह कम से कम दस मिनट ध्यान करना चाहिए। ये दस मिनट आपको अपने ऊपर खर्च करने चाहिए। इसी तरह शाम को भी कुछ वक्त अपने साथ गुजारें। इस तरह आप खुद को जान पाएंगे।
9. *क्रोध से बचना* – कभी अपना गुस्सा ज़ाहिर न करें। जब कभी आपको लगे कि आपका दोस्त आपके साथ तल्ख हो रहा है, तो आप उस वक्त उससे दूर हो जाएं, बजाय इसके कि वहीं उसका हिसाब-किताब करने पर आमदा हो जाएं।
10. *अंतिम समय* – जब यमराज दस्तक दें, तो बिना किसी दुख, शोक या अफसोस के साथ उनके साथ निकल पड़ना चाहिए अंतिम यात्रा पर, खुशी-खुशी। शोक, मोह के बंधन से मुक्त हो कर जो यहां से निकलता है, उसी का जीवन सफल होता है.
सुविचार – इन्सान की तीस गलतियां – 1022
1. इस ख्याल में रहना कि जवानी और तन्दुरुस्ती हमेशा रहेगी।
2. खुद को दूसरों से बेहतर समझना।
3. अपनी अक्ल को सबसे बढ़कर.समझना।
4. दुश्मन को कमजोर समझना।
5. बीमारी को मामुली समझकर शुरु में इलाज न करना।
6. अपनी राय को मानना और दूसरों के मशवरें को ठुकरा देना।
7. किसी के बारे में मालुम होना फिर भी उसकी चापलुसी में बार-बार आ जाना।
8. बेकारी में आवारा घुमना और रोज़गार की तलाश न करना।
9. अपना राज़ किसी दूसरे को बता कर उससे छुपाए रखने की ताकीद करना।
10. आमदनी से ज्यादा खर्च करना।
11. लोगों की तक़लिफों में शरीक न होना, और उनसे मदद की उम्मीद रखना।
12. एक दो मुलाक़ात में किसी के बारे में अच्छी राय कायम करना।
13. माँ-बाप की खिदमत न करना और अपनी औलाद से खिदमत की उम्मीद रखना।
14. किसी काम को ये सोचकर अधुरा, छोड़ना कि फिर किसी दिन पुरा कर लिया जाएगा।
15. दुसरों के साथ बुरा करना और उनसे अच्छे की उम्मीद रखना।
16. आवारा लोगों के साथ उठना बैठना।
17. कोई अच्छी राय दे तो उस पर ध्यान न देना।
18. खुद हराम व हलाल का ख्याल न करना और दूसरों को भी इस राह पर लगाना।
19. झूठी कसम खाकर, झूठ बोलकर, धोखा देकर अपना माल बेचना, या व्यापार करना।
20. इल्म, दीन या दीनदारी को इज्जतन समझना।
21. मुसिबतों में बेसब्र बन कर चीख़ पुकार करना।
22. फकीरों, और गरीबों को अपने घर से धक्का दे कर भगा देना।
23. ज़रुरत से ज्यादा बातचीत करना।
24. पड़ोसियों से अच्छा व्यवहार नहीं रखना।
25. बादशाहों और अमीरों की दोस्ती पर यकीन रखना।
26. बिना वज़ह किसी के घरेलू मामले में.दखल देना।
27. बगैर सोचे समझे बात करना।
28. तीन दिन से ज्यादा किसी का.मेहमान बनना।
29. अपने घर का भेद दूसरों पर ज़ाहिर करना।
30. हर एक के सामने अपना दुख दर्द सुनाते रहना।
सुविचार – आखिर अंतर रह ही गया…… – 1021
बचपन में जब हम ट्रेन की सवारी करते थे, तो मां घर से सफर के लिए खाना बनाकर लें जाती थी, पर ट्रेन में जब कुछ लोगों को खाना खरीद कर खाते देखते, तो बड़ा मन करता कि हम भी खरीद कर खायें. पापा ने समझाया कि ये हमारे बस का नहीं है. अमीर लोग इस तरह पैसे खर्च कर सकते हैं, हम नहीं. बड़े होकर देखा, जब हम खाना खरीद कर खा रहें हैं, तो वो अमीर लोग घर से भोजन बांध कर ले जा रहें हैं. स्वास्थ के प्रति चेतन हैं वे.
आखिर वो अंतर रह ही गया……
बचपन में जब हम सूती कपड़ा पहनते थे, तब वो वर्ग टेरीलीन का वस्त्र पहनता था. बड़ा मन करता था टेरीलीन पहनने का, पर पापा कहते कि हम इतना खर्च नहीं कर सकते.
बड़े हो कर जब हम टेरीलीन पहने, तब वो वर्ग सूती के कपड़े पहनने लगा. सूती कपड़े महंगे हो गए. हम अब उतना खर्च नहीं कर सकते.
आखिर अंतर रह ही गया……
बचपन में जब खेलते खेलते हमारी पतलून घुटनो के पास से फट जाती, तो मां बड़ी ही कारीगरी से उसे रफू कर देती और हम खुश हो जाते. बस उठते बैठते अपने हाथों से घुटनो के पास का वो हिस्सा ढक लेते. बड़े हो कर देखा वो वर्ग घुटनो के पास फटे पतलून महंगे दामों में बड़े दुकानों से खरीद कर पहन रहा है, और हम उसे खरीद नहीं पा रहे हैं.
आखिर अंतर रह ही गया……
बचपन में हम साईकल बड़ी मुश्किल से पाते, और वे स्कूटर पर जाते. जब हमने स्कूटर खरीदा, तो वो कार की सवारी करने लगे और जब तक हमने मारुती खरीदी, वो बीएमडब्लू पर जाते दिखे.
आखिर अंतर रह ही गया……
और हमने जब अंतर मिटाने के लिए रिटायरमेंट का पैसा लगाकर BMW खरीदी, तो वो वर्ग साइकिलिंग करता नजर आया.
आखिर अंतर रह ही गया……
सुविचार – ज़िन्दगी की अनमोल बातें – 1020
- 1 साल …..की कीमत उससे पूछो जो Fail हुआ हो.
- 1 महीने …..की कीमत उससे पूछो जिसको पिछले महीने Salary ना मिली हो.
- 1 हफ्ते …..की कीमत उससे पूछो जो पूरा हफ़्ता Hospital में रहा हो.
- 1 दिन …..की कीमत उससे पूछो जो सारा दिन से भूखा हो.
- 1 घंटे …..की कीमत उससे पूछो जिसने किसी का इन्तज़ार किया हो.
- 1 मिनट …..की कीमत उससे पूछो जिसकी Train एक मिनट से मिस हुई हो.
- 1 सेकंड …..की कीमत उससे पूछो जो Accident से बाल – बाल बचा हो.
- इसलिए हर पल का शुक्रिया करो …… खुश रहो….





