सुविचार – उम्र को” दराज में रख दें, उम्रदराज न बनें – 1025

“उम्र को” दराज में रख दें, उम्रदराज न बनें।

खो जाएं जिन्दगी में, खुद को खोने का इन्तजार न करें।
जिनको आना है आए, जिसको जाना है जाए,
पर हमें जीना है, हैं, ये न भूल जाएं।
जिनसे मिलता है प्यार, उनसे ही मिलें बार बार,
कभी बचपन को जीएं, तो कभी जवानी को,
पर न छोड़ें बुढापे में भी सपने संजोने को।
महफिलों का शौक रखें, दोस्तों से प्यार करें,
जो रिश्ते हमें समझ सकें, उन रिश्तों की कद्र करें।
बंधें नहीं किसी से भी, ना किसी को बँधने पर मजबूर करें।
दिल से जोड़ें हर रिश्ता, और उन रिश्तों से दिल से जुड़े रहें।
हँसना अच्छा होता है, पर अपनों के लिये रोया भी करें।
याद आएं कभी अपने तो, आँखें अपनी नम भी करें,
ध्यान रखें कि जिन्दगी चार दिन की है,
तो फिर शिकवे शिकायतें कम ही करें …
“*उम्र को* दराज में रख दें ” उम्रदराज न बनें।”

सुविचार – जिन्दगी का सफ़र, हैं ये कैसा सफ़र – 1024

जिन्दगी का सफ़र, हैं ये कैसा सफ़र

_ कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं
_ है ये कैसी डगर, चलते हैं सब मगर
_ कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं
_ जिन्दगी को बहोत प्यार हम ने किया
_ मौत से भी मोहब्बत निभायेंगे हम
_ रोते रोते जमाने में आये मगर
_ हंसते हंसते जमाने से जायेंगे हम
_ जायेंगे पर किधर, हैं किसे ये खबर
_ कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं
_ ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं
_ जिनको जीने से पहले ही मौत आ गयी
_ फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं
_ जिनको खिलने से पहले खिजा खा गयी
_ है परेशान नजर, थक गए चार अगर
_ कोई समझा नहीं, कोई जाना नही.!!
सफ़र कभी खत्म नहीं होता.. जीवन चूकते जाता है आहिस्ता आहिस्ता..
_ हम बीतते जाते हैं.. और एक दिन सब यहीं रह जाता है.!!
ये तस्वीर सिर्फ़ एक सफ़र नहीं, हौसले, जज़्बे और सपनों की कहानी है 🚴‍♂️🌧️

_ बारिश, ठंडी हवा और लंबा रास्ता… फिर भी चेहरे पर मुस्कान और दिल में जुनून 💙
_ क्योंकि असली खुशी मंज़िल में नहीं, हर मुश्किल को पार करते सफ़र में मिलती है ✨
_ आज की थकान, कल की सबसे बड़ी जीत बनेगी. 💪
– Cycle Baba
“उड़ना है तो डरना कैसा? पानी गहरा हो या रास्ता फिसलन भरा… कोशिश जारी रखो!” 😄

और हम इंसान छोटी-छोटी बातों पर टेंशन ले लेते हैं ! 😂
सीख यही है –
हालात कैसे भी हों, अपने हौसलों को गीला मत होने दो. 🕊️
– Cycle Baba[/su_quote
सपने बड़े रखो, दिल शांत रखो, और सफर का मज़ा लो…

_ शहर बदले या हालात, हिम्मत मत बदलना.
– Cycle Baba
जिंदगी भी कभी-कभी ऐसे ही जकड़ लेती है —

EMI 🧾, जिम्मेदारियाँ 🏠, सपने ✨ और लोगों की बातें 😅
पर असली खिलाड़ी वही है जो कहे —
“लिपटो जितना लिपटना है… मैं फिर भी आगे बढ़ूंगा!” 🚴‍♂️🔥
– Cycle Baba
एयरपोर्ट की भीड़ में खड़ा था… ✈️ चारो तरफ लोग थे, घोषणाएं थीं, उड़ानें थीं…

_ पर मेरे अंदर सिर्फ खामोशी चल रही थी.
_ कभी सोचा नहीं था कि एक दिन सफर सिर्फ जगह बदलने का नहीं, खुद को समझने का ज़रिया बन जाएगा.
_ इस फोटो में मेरा हाथ “बाय” बोल रहा है…पर असली में ये उन दोस्तों को अलविदा था, जो सालों से अंदर छुपे बैठे थे.
_ सफ़र ने एक बात सिखा दी – इंसान जब घर से बाहर निकलता है ना, तब सिर्फ दुनिया नहीं देखता… वो अपने अंदर के टूटे हुए हिस्सों से भी मिलता है.
_ कई बार flights लेट हुई, plans खराब हो गए, पैसे कम पड़े, language समझ नहीं आई… पर हर problem ने एक नया version बना दिया.
_ और मजेदार बात ये है 😅 airport पर सब लोग अपनी flight पकड़ने की जल्दी में थे… और मैं जिंदगी को थोड़ा धीरे समझने की कोशिश कर रहा था.
_ आज भी मंजिल [destination] से ज्यादा सुकून उन रास्तों में मिलता है, जहां इंसान खुद से मिलने लगता है.
– Cycle Baba

सुविचार – ज़िंदगी के दस सूत्र ” – 1023

ज़िंदगी के दस सूत्र “

इन दसों सूत्रों को पढ़ने के बाद पता चला कि सचमुच खुशहाल ज़िंदगी और शानदार मौत के लिए ये सूत्र बहुत ज़रूरी हैं।

1. *अच्छा स्वास्थ्य* – अगर आप पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं, तो आप कभी खुश नहीं रह सकते। बीमारी छोटी हो या बड़ी, ये आपकी खुशियां छीन लेती हैं।

2. *ठीक ठाक बैंक बैलेंस* – अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत अमीर होना ज़रूरी नहीं। पर इतना पैसा बैंक में हो कि आप आप जब चाहे बाहर खाना खा पाएं, सिनेमा देख पाएं, समंदर और पहाड़ घूमने जा पाएं, तो आप खुश रह सकते हैं। उधारी में जीना आदमी को खुद की निगाहों में गिरा देता है।

3. *अपना मकान* – मकान चाहे छोटा हो या बड़ा, वो आपका अपना होना चाहिए। अगर उसमें छोटा सा बगीचा हो तो आपकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल हो सकती है।

4. *समझदार जीवन साथी* – जिनकी ज़िंदगी में समझदार जीवन साथी होते हैं, जो एक-दूसरे को ठीक से समझते हैं, उनकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल होती है, वर्ना ज़िंदगी में सबकुछ धरा का धरा रह जाता है, सारी खुशियां काफूर हो जाती हैं। हर वक्त कुढ़ते रहने से बेहतर है अपना अलग रास्ता चुन लेना।

5. *दूसरों की उपलब्धियों से न जलना* – कोई आपसे आगे निकल जाए, किसी के पास आपसे ज़्यादा पैसा हो जाए, तो उससे जले नहीं। दूसरों से खुद की तुलना करने से आपकी खुशियां खत्म होने लगती हैं।

6. *गप से बचना* – लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए। जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे और दूसरों की चुगली-निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा।

7. *अच्छी आदत* – कोई न कोई ऐसी हॉबी विकसित करें, जिसे करने में आपको मज़ा आता हो, मसलन गार्डेनिंग, पढ़ना, लिखना। फालतू बातों में समय बर्बाद करना ज़िंदगी के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अपराध है। कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे आपको खुशी मिले और उसे आप अपनी आदत में शुमार करके नियमित रूप से करें।

8. *ध्यान* – रोज सुबह कम से कम दस मिनट ध्यान करना चाहिए। ये दस मिनट आपको अपने ऊपर खर्च करने चाहिए। इसी तरह शाम को भी कुछ वक्त अपने साथ गुजारें। इस तरह आप खुद को जान पाएंगे।

9. *क्रोध से बचना* – कभी अपना गुस्सा ज़ाहिर न करें। जब कभी आपको लगे कि आपका दोस्त आपके साथ तल्ख हो रहा है, तो आप उस वक्त उससे दूर हो जाएं, बजाय इसके कि वहीं उसका हिसाब-किताब करने पर आमदा हो जाएं।

10. *अंतिम समय* – जब यमराज दस्तक दें, तो बिना किसी दुख, शोक या अफसोस के साथ उनके साथ निकल पड़ना चाहिए अंतिम यात्रा पर, खुशी-खुशी। शोक, मोह के बंधन से मुक्त हो कर जो यहां से निकलता है, उसी का जीवन सफल होता है.

सुविचार – इन्सान की तीस गलतियां – 1022

इन्सान की तीस गलतियां: –

1. इस ख्याल में रहना कि जवानी और तन्दुरुस्ती हमेशा रहेगी।

2. खुद को दूसरों से बेहतर समझना।

3. अपनी अक्ल को सबसे बढ़कर.समझना।

4. दुश्मन को कमजोर समझना।

5. बीमारी को मामुली समझकर शुरु में इलाज न करना।

6. अपनी राय को मानना और दूसरों के मशवरें को ठुकरा देना।

7. किसी के बारे में मालुम होना फिर भी उसकी चापलुसी में बार-बार आ जाना।

8. बेकारी में आवारा घुमना और रोज़गार की तलाश न करना।

9. अपना राज़ किसी दूसरे को बता कर उससे छुपाए रखने की ताकीद करना।

10. आमदनी से ज्यादा खर्च करना।

11. लोगों की तक़लिफों में शरीक न होना, और उनसे मदद की उम्मीद रखना।

12. एक दो मुलाक़ात में किसी के बारे में अच्छी राय कायम करना।

13. माँ-बाप की खिदमत न करना और अपनी औलाद से खिदमत की उम्मीद रखना।

14. किसी काम को ये सोचकर अधुरा, छोड़ना कि फिर किसी दिन पुरा कर लिया जाएगा।

15. दुसरों के साथ बुरा करना और उनसे अच्छे की उम्मीद रखना।

16. आवारा लोगों के साथ उठना बैठना।

17. कोई अच्छी राय दे तो उस पर ध्यान न देना।

18. खुद हराम व हलाल का ख्याल न करना और दूसरों को भी इस राह पर लगाना।

19. झूठी कसम खाकर, झूठ बोलकर, धोखा देकर अपना माल बेचना, या व्यापार करना।

20. इल्म, दीन या दीनदारी को इज्जतन समझना।

21. मुसिबतों में बेसब्र बन कर चीख़ पुकार करना।

22. फकीरों, और गरीबों को अपने घर से धक्का दे कर भगा देना।

23. ज़रुरत से ज्यादा बातचीत करना।

24. पड़ोसियों से अच्छा व्यवहार नहीं रखना।

25. बादशाहों और अमीरों की दोस्ती पर यकीन रखना।

26. बिना वज़ह किसी के घरेलू मामले में.दखल देना।

27. बगैर सोचे समझे बात करना।

28. तीन दिन से ज्यादा किसी का.मेहमान बनना।

29. अपने घर का भेद दूसरों पर ज़ाहिर करना।

30. हर एक के सामने अपना दुख दर्द सुनाते रहना।

सुविचार – आखिर अंतर रह ही गया…… – 1021

आखिर अंतर रह ही गया……

बचपन में जब हम ट्रेन की सवारी करते थे, तो मां घर से सफर के लिए खाना बनाकर लें जाती थी, पर ट्रेन में जब कुछ लोगों को खाना खरीद कर खाते देखते, तो बड़ा मन करता कि हम भी खरीद कर खायें. पापा ने समझाया कि ये हमारे बस का नहीं है. अमीर लोग इस तरह पैसे खर्च कर सकते हैं, हम नहीं. बड़े होकर देखा, जब हम खाना खरीद कर खा रहें हैं, तो वो अमीर लोग घर से भोजन बांध कर ले जा रहें हैं. स्वास्थ के प्रति चेतन हैं वे.

आखिर वो अंतर रह ही गया……

बचपन में जब हम सूती कपड़ा पहनते थे, तब वो वर्ग टेरीलीन का वस्त्र पहनता था. बड़ा मन करता था टेरीलीन पहनने का, पर पापा कहते कि हम इतना खर्च नहीं कर सकते.

बड़े हो कर जब हम टेरीलीन पहने, तब वो वर्ग सूती के कपड़े पहनने लगा. सूती कपड़े महंगे हो गए. हम अब उतना खर्च नहीं कर सकते.

आखिर अंतर रह ही गया……

बचपन में जब खेलते खेलते हमारी पतलून घुटनो के पास से फट जाती, तो मां बड़ी ही कारीगरी से उसे रफू कर देती और हम खुश हो जाते. बस उठते बैठते अपने हाथों से घुटनो के पास का वो हिस्सा ढक लेते. बड़े हो कर देखा वो वर्ग घुटनो के पास फटे पतलून महंगे दामों में बड़े दुकानों से खरीद कर पहन रहा है, और हम उसे खरीद नहीं पा रहे हैं.

आखिर अंतर रह ही गया……

बचपन में हम साईकल बड़ी मुश्किल से पाते, और वे स्कूटर पर जाते. जब हमने स्कूटर खरीदा, तो वो कार की सवारी करने लगे और जब तक हमने मारुती खरीदी, वो बीएमडब्लू पर जाते दिखे.

आखिर अंतर रह ही गया……

और हमने जब अंतर मिटाने के लिए रिटायरमेंट का पैसा लगाकर BMW खरीदी, तो वो वर्ग साइकिलिंग करता नजर आया.

आखिर अंतर रह ही गया……

सुविचार – ज़िन्दगी की अनमोल बातें – 1020

ज़िन्दगी की अनमोल बातें :-

 

  • 1 साल …..की कीमत उससे पूछो जो Fail हुआ हो.
  • 1 महीने …..की कीमत उससे पूछो जिसको पिछले महीने Salary ना मिली हो.
  • 1 हफ्ते …..की कीमत उससे पूछो जो पूरा हफ़्ता Hospital में रहा हो.
  • 1 दिन …..की कीमत उससे पूछो जो सारा दिन से भूखा हो.
  • 1 घंटे …..की कीमत उससे पूछो जिसने किसी का इन्तज़ार किया हो.
  • 1 मिनट …..की कीमत उससे पूछो जिसकी Train एक मिनट से मिस हुई हो.
  • 1 सेकंड …..की कीमत उससे पूछो जो Accident से बाल – बाल बचा हो.
  • इसलिए हर पल का शुक्रिया करो …… खुश रहो….
error: Content is protected