सुविचार 886

आदमी की परख उस के पास रहने से होती है. किसी आदमी को यों ही बुरा कह देना तब तक ठीक नहीं जब तक समीप से उस के गुणदोषों की परीछा न कर ली जाए.

सुविचार 885

प्रसन्न ह्रदय मनुष्य वह सूर्य है, जिस की किरणें अनेक हृदयों के शोक रूपी अन्धकार को दूर भगा देती है.

सुविचार 884

मन में हमेशा अच्छे विचार और अच्छे अहसासों को ही जगह दीजिए, ताकि दिमाग में सदा पॉजिटिव तरंगों का उदय हो.

सुविचार 882

अपनी मस्ती में गुनगुनाता वही है, जो अन्दर से शान्त है, संतुष्ट है, विचारों से रिक्त है, सन्तुलित है, मर्यादित है. 
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