जीवन जीने के लिए सन्तुलन की बड़ी आवश्यकता है और सन्तुलन बिगाड़ने के लिए न जाने कितनी- कितनी परिस्थितियाँ हमारे सामने रोज आती हैं — यह ध्यान रखना पड़ेगा कि परिस्थिति कुछ भी हो, हमें अपने आप को सम्भालना है.
मनुष्य विपरीत परिस्थितियों में भी कैसे खुश रह सकता है – यह मंत्र अगर आप को आ गया, तो समझिए जीवन अनमोल है, वरना हम लोग जीवन को जहर समझ कर ही पीते रहते हैं और हर छोटी छोटी बात का रोना रोते रहते हैं.
“जीवन इतना कष्टमय और दुखदायी नहीं है, जितना हम समझते हैं.”