सुविचार 533

क्रोध एक प्रकार की आंधी है, जब वह आती है तो विवेक को नष्ट कर देती है.

सुविचार 532

सत्य एक चीड़ फाड़ के समान है, कष्टप्रद है पर मर्ज ठीक करता है. झूठ एक दर्द निवारक के समान है, तुरन्त राहत देता है पर बाद में इसके दुष्परिणाम भी हैं.

सुविचार 531

ऐसा नहीं है कि इस दुनिया में हर तरफ बुरा ही बुरा हो रहा है, अनगिनत रचनात्मक लोग कुछ नये और शुभ कार्यों में सलग्न हैं .

सुविचार 530

जैसे पर्वत शिखरों के बीच से उठती हुई नदियाँ अपने तेज प्रवाह के साथ छोटे- मोटे पत्थरों को भी बहाकर ले जाती है. ऎसे ही आपका उत्साह विघ्न- बाधाओं को पार कर सकता है, अपने उत्साह को कभी ठण्डा मत पड़ने देना, अपने शरीर के रोम- रोम को उत्साह से भरपूर रखिए. 

सुविचार 529

यदि हम शान्ति का सर्मथन करना चाहते हैँ तो हमेँ इसके लिए चीखने – चिल्लाने की क्या आवश्यकता है.

सुविचार 528

“दिव्य गुण – सहनशिलता, नम्रता, निर्भयता, अन्तर्मुखता, धैर्यता, मधुरता, हर्षितमुखता, पवित्रता”
error: Content is protected