“बाद में”
– आपसे बाद में बात करूँगा.
– मैं आपको बाद में फोन करूँगा.
– बाद में मिलते हैं.
– हम बाद में टहलेंगे.
“मैं आपको बाद में बताऊँगा.”
हम सब कुछ बाद के लिए छोड़ देते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि “बाद में” हमारे पास नहीं होता.
बाद में, हमारे प्रियजन हमारे साथ नहीं रहते.
बाद में, हम उन्हें सुन नहीं पाते, न ही देख पाते हैं.
बाद में, वे सिर्फ यादें बनकर रह जाते हैं.
बाद में, दिन रात बन जाता है, ताकत बेबसी में बदल जाती है,
मुस्कान एक तिरछी रेखा बन जाती है, और जीवन मृत्यु में बदल जाता है.
“बाद में” बन जाता है “बहुत देर हो चुकी”