सुविचार 686
जीवन में दुर्घटनाएँ होती रहती हैं, इसका मतलब यह नहीं कि ज़िन्दगी की आस ही छोड़ दी जाए.
ज़िन्दगी आपकी है, उस के जीने का अन्दाज आप का है. यह आप पर निर्भर करता है कि उसे हँसी की खिलखिलाहट से खुशनुमा बनाते हैं या उदासी के घेरे में डूब कर ज़िन्दगी की राह को कठिन बनाते हैं.
_ जब मन ही प्रसन्न नहीं रहेगा तो समय किस काम का, _ तो मन को खुश रखना सबसे जरुरी है.